फिल्म ‘धुरंधर’ में जहूर मिस्त्री के प्रभावशाली और डरावने किरदार को निभाने वाले अभिनेता विवेक सिन्हा इन दिनों अपनी सशक्त अभिनय क्षमता को लेकर चर्चा में हैं। जहां एक ओर उनके प्रदर्शन की व्यापक सराहना हो रही है, वहीं कुछ दर्शकों ने फिल्म के एक संवाद को लेकर आपत्ति भी जताई है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में विवेक ने बताया कि उन्हें एक महिला दर्शक की ओर से आपत्तिजनक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें उनके किरदार को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई थी। अभिनेता के अनुसार, फिल्म में उनके किरदार द्वारा बोले गए एक संवाद को लेकर कुछ लोगों ने असहमति जाहिर की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विवेक ने चुप रहने के बजाय उस महिला को एक वॉयस नोट भेजकर अपनी बात स्पष्ट करने और स्थिति को समझाने का प्रयास किया।
क्या था वो डायलॉग जिसने मचाया है बवाल?
फिल्म ‘धुरंधर’ में अभिनेता विवेक सिन्हा ने एक आतंकवादी का किरदार निभाया है, जो कहानी में एक भारतीय जहाज को हाईजैक करता है। इस भूमिका को लेकर उन्हें दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। विवेक ने बताया कि उन्हें एक महिला का संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें उनके इस तरह के किरदार को स्वीकार करने पर आपत्ति जताई गई थी। संदेश में यह भी कहा गया कि एक हिंदू होने के बावजूद उन्होंने ऐसे संवाद कैसे बोले। दरअसल, फिल्म में उनके किरदार का एक विवादित डायलॉग है, जिसमें हिंदुओं को डरपोक बताया गया है। शुरुआत में विवेक ने इस टिप्पणी को नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में उन्होंने महिला को जवाब देकर स्पष्ट किया कि यह केवल उनके किरदार का हिस्सा है, न कि उनकी व्यक्तिगत सोच।
‘क्या पाकिस्तान से असली आतंकवादी बुलाएं?’
विवेक सिन्हा ने अपने बयान में कहा कि फिल्में समाज का प्रतिबिंब होती हैं और उनमें किरदारों को उनकी वास्तविकता के अनुरूप ही प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि यदि किसी फिल्म में एक खतरनाक आतंकी की मानसिकता दिखानी हो, जो बंदूक के बल पर धमकी दे रहा हो, तो क्या उसके लिए सच में किसी आतंकी को बुलाया जाना चाहिए? उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किरदारों को प्रभावी तरीके से दर्शाने की जिम्मेदारी कलाकारों की होती है, ताकि दर्शक उस चरित्र की क्रूरता और सोच को बेहतर ढंग से समझ सकें।
एक्टिंग और असलियत के बीच समझाया फर्क
अपनी बात स्पष्ट करते हुए विवेक ने उदाहरण दिया कि यदि किसी फिल्म में हत्या का दृश्य दिखाना हो, तो क्या उसके लिए वास्तविक अपराधियों को जेल से लाकर अभिनय कराया जाना चाहिए? उन्होंने बताया कि इसी तर्क को उन्होंने संबंधित महिला को वॉयस नोट के माध्यम से समझाने की कोशिश की, लेकिन उसके बाद उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हालांकि कुछ लोग उनके डायलॉग पर आपत्ति जता रहे हैं, फिर भी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी इस छोटी लेकिन प्रभावशाली भूमिका की सराहना की जा रही है।