सरकार द्वारा सिगरेट पर टैक्स बढ़ाए जाने का असर अब उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। देश की प्रमुख कंपनियां जैसे ITC Ltd और Godfrey Phillips India ने बढ़े हुए टैक्स के प्रभाव को संतुलित करने के लिए अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा किया, लेकिन इस कदम से मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता नजर आ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में सिगरेट की बिक्री में लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अप्रैल में यह गिरावट और गहराने की संभावना जताई जा रही है। प्रति पैक ₹22 से ₹55 तक कीमत बढ़ने के कारण उपभोक्ताओं की खरीदारी प्रभावित हुई है, जिससे कंपनियों के वॉल्यूम ग्रोथ पर दबाव साफ देखा जा रहा है।
शेयर बाजार पर बड़ा असर
शेयर बाजार पर भी इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। वर्ष की शुरुआत से अब तक सिगरेट कंपनियों के शेयरों में लगभग 10% से 17% तक की गिरावट दर्ज की गई है। ITC Ltd का शेयर करीब 17% गिरकर ₹300 के आसपास पहुंच गया है। वहीं Godfrey Phillips India और VST Industries के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन कंपनियों के मुनाफे पर 15% से 20% तक दबाव पड़ सकता है, क्योंकि बढ़ी हुई लागत को पूरी तरह उपभोक्ताओं पर डालना आसान नहीं होता।
कंपनियों का शेयर परफॉर्मेंस
13 अप्रैल 2026 को सिगरेट सेक्टर से जुड़े प्रमुख शेयरों में कमजोरी का रुख देखने को मिला। ITC Limited का स्टॉक 1.84% की गिरावट के साथ ₹298.65 पर बंद हुआ, जिस पर हालिया टैक्स बढ़ोतरी और सिगरेट बिक्री में कमी की खबरों का असर साफ नजर आया। इसी तरह, Godfrey Phillips India के शेयरों में भी दबाव बना रहा और यह 2.48% फिसलकर ₹2,049.50 पर आ गया। वहीं, VST Industries Limited के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जो 0.73% गिरकर ₹227.00 पर बंद हुआ।
ITC और अन्य कंपनियों के लिए कॉल?
हालांकि, इस सेक्टर की सभी कंपनियों पर प्रभाव समान रूप से नहीं पड़ा है। उदाहरण के तौर पर, ITC लिमिटेड (ITC Ltd) अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में नजर आती है, क्योंकि इसका कारोबार केवल तंबाकू तक सीमित नहीं है। कंपनी का FMCG, एग्रीबिजनेस और पेपरबोर्ड जैसे विविध क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति होना इसे अतिरिक्त स्थिरता प्रदान करता है, जिससे किसी एक सेगमेंट में कमजोरी का असर सीमित हो जाता है।
वहीं दूसरी ओर, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (Godfrey Phillips India) जैसी कंपनियां अधिक दबाव में हैं, क्योंकि उनका अधिकांश राजस्व तंबाकू उत्पादों पर निर्भर करता है। इसी वजह से बाजार विश्लेषक ITC के शेयरों पर तुरंत ‘सेल’ की सलाह देने से बच रहे हैं, जबकि पूरी तरह तंबाकू आधारित कंपनियों को लेकर जोखिम का स्तर अपेक्षाकृत अधिक माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट राय क्या है?
अब मुख्य सवाल यह उठता है कि क्या निवेशकों को इन शेयरों से बाहर निकल जाना चाहिए। Mint की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों की राय है कि केवल एक या दो तिमाहियों के कमजोर प्रदर्शन के आधार पर जल्दबाजी में निर्णय लेना उचित नहीं है। सिगरेट उद्योग पहले भी कई बार टैक्स बढ़ोतरी जैसी चुनौतियों का सामना कर चुका है और लंबे समय में खुद को स्थिर बनाए रखने की क्षमता रखता है। ऐसे में दीर्घकालिक निवेशकों को घबराकर तुरंत बिक्री करने से बचना चाहिए, हालांकि अल्पकालिक अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।