शुक्रवार को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के स्टॉक में जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में 5% के अपर सर्किट पर बंद हुए, जिसके बाद इसका भाव बढ़कर ₹43.52 तक पहुंच गया। यह तेजी FMCG और तंबाकू सेक्टर से जुड़ी इस कंपनी के शेयर में उस समय आई जब इसमें मजबूत कारोबारी खबर सामने आई।
कंपनी ने जानकारी दी है कि उसे दक्षिण अफ्रीका की बोज्जा टोबैको (PTY) से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की सप्लाई के लिए एक लंबी अवधि का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस समझौते के तहत एलीटकॉन इंटरनेशनल अपने विभिन्न ब्रांड्स जैसे Red and Black, B&W, Cape, Ossum और Golden Flake नामक सिगरेट की आपूर्ति करेगी। यह ऑर्डर करीब ₹202 करोड़ का है, जिसे अगले दो वर्षों के भीतर पूरा किया जाना है।
शेयर का परफॉर्मेंस
एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों ने हाल के समय में तेज उतार-चढ़ाव दिखाया है। पिछले एक महीने में इस स्मॉल-कैप स्टॉक में 18% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि साल-दर-साल (YTD) आधार पर इसमें करीब 57% की कमजोरी देखने को मिली है। वहीं, छह महीने की अवधि में शेयर लगभग 72% तक टूट चुका है। हालांकि, एक साल के लंबे समय में इसमें 12% से अधिक की बढ़त भी दर्ज हुई है। इसके बावजूद, लंबे समय के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में इस स्टॉक ने निवेशकों को 3200% से अधिक का शानदार मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।
सेबी ने लिया है एक्शन
हाल ही में पूंजी बाजार नियामक सेबी ने कथित बाजार हेरफेर और निवेशकों को गुमराह करने से जुड़े आरोपों के मामले में एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड, उसके प्रवर्तक एवं प्रबंध निदेशक विपिन शर्मा सहित चार अन्य लोगों को सिक्योरिटी मार्केट में किसी भी प्रकार के लेन-देन से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में विपिन शर्मा और संबंधित इकाइयों से लगभग 51.26 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई को जब्त करने का निर्देश भी दिया है।
सेबी ने संकेत दिया है कि इस मामले की विस्तृत जांच आगे जारी रहेगी और इसके लिए एक फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति भी की जाएगी। यह कार्रवाई एलीटकॉन इंटरनेशनल के शेयरों में असामान्य गतिविधियों की जांच के बाद सामने आई है।
नियामक की प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि कंपनी और उससे जुड़े पक्षों द्वारा निवेशकों को प्रभावित करने के उद्देश्य से अपनी वास्तविक वित्तीय और परिचालन स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को पूरी तरह उजागर नहीं किया गया। आरोपों के अनुसार, इसी दौरान शेयरों की कीमतों में बढ़ोतरी का लाभ उठाते हुए कुछ लेन-देन किए गए।
इसके अलावा सेबी ने यह भी उल्लेख किया है कि जहां एक ओर सकारात्मक घोषणाएं की गईं, वहीं दूसरी ओर जीएसटी से संबंधित मामलों और अन्य नकारात्मक घटनाक्रमों जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को निवेशकों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचाया गया, जिससे बाजार में पारदर्शिता पर सवाल उठे।