Hanuman Ansh Producer Anupriya Nagar: महज 21 साल की उम्र में फिल्म प्रोड्यूस कर चर्चा में आईं अनुप्रिया नागर इन दिनों सुर्खियों में हैं। बताया जा रहा है कि कम बजट में बनी डिवोशनल फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता के पीछे उनकी दिलचस्प कहानी है। खास बात यह है कि फिल्ममेकिंग की दुनिया में आने की प्रेरणा उन्हें एक ऐसी रिसर्च के दौरान मिली, जिसका संबंध स्टीव जॉब्स और भारत की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ता है।
हनुमान अंश की सफलता के साथ चर्चा में आईं अनुप्रिया नागर
डिवोशनल फिल्म ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। सीमित बजट और अपेक्षाकृत कम प्रचार के साथ सिनेमाघरों में पहुंची इस फिल्म ने धीरे-धीरे दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
फिल्म की सफलता के साथ इसके निर्माण से जुड़ी युवा प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर (Anupriya Nagar) भी सुर्खियों में आ गई हैं। महज 21 वर्ष की उम्र में फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ना और एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना उनकी कहानी को खास बनाता है।
कौन हैं अनुप्रिया नागर?
अनुप्रिया नागर का संबंध ऐसे परिवार से बताया जाता है, जहां कला और कलाकारों का माहौल लंबे समय से रहा है। कला के प्रति रुचि होने के कारण उनकी दिलचस्पी शुरू से ही कहानी, रचनात्मकता और विजुअल एक्सप्रेशन में रही।
उन्होंने कला जगत से जुड़े कई कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के साथ भी काम किया है। अनुप्रिया के अनुसार, कलाकारों और कला संग्रह से जुड़े माहौल में बड़े होने का असर उनकी सोच और कहानी कहने की रुचि पर पड़ा।
वह प्रसिद्ध भारतीय कलाकारों की कला और उनके काम से परिचित माहौल में पली-बढ़ीं। यही कारण है कि रचनात्मक अभिव्यक्ति और स्टोरीटेलिंग उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गई।

UK में पढ़ाई के दौरान शुरू हुई एक अलग खोज
फिल्ममेकिंग की दुनिया में आने से पहले अनुप्रिया नागर की योजना बिल्कुल अलग थी। वह ब्रिटेन में इकोनॉमिक्स की पढ़ाई कर रही थीं और भविष्य में आर्ट इंडस्ट्री में करियर बनाने की तैयारी कर रही थीं।
बताया जाता है कि पढ़ाई के दौरान वह बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों और उनके संस्थापकों के विचारों एवं प्रेरणाओं पर रिसर्च कर रही थीं। इसी दौरान उनकी दिलचस्पी एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा और आध्यात्मिक अनुभवों से जुड़े किस्सों में बढ़ी।
यहीं से उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया।
स्टीव जॉब्स और नीम करौली बाबा से जुड़ी कहानी ने बदली सोच
अपनी रिसर्च के दौरान अनुप्रिया को स्टीव जॉब्स और भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े प्रसंगों के बारे में जानकारी मिली। स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा और नीम करौली बाबा से जुड़े आध्यात्मिक प्रभाव की कहानियां लंबे समय से चर्चाओं का विषय रही हैं।
इस विषय पर गहराई से जानने के बाद अनुप्रिया की रुचि भारतीय आध्यात्मिक कहानियों और उनके सिनेमाई प्रस्तुतीकरण की ओर बढ़ने लगी।
उनका शुरुआती प्लान फिल्म निर्माण नहीं था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह स्विट्जरलैंड जाकर कला क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रही थीं। हालांकि, भारत लौटने के बाद परिस्थितियों ने उन्हें एक बिल्कुल अलग रास्ते पर पहुंचा दिया।
विशाल चतुर्वेदी से मुलाकात और फिल्ममेकिंग में एंट्री
भारत आने के बाद अनुप्रिया नागर की मुलाकात फिल्ममेकर डॉ. विशाल चतुर्वेदी से हुई। उस समय विशाल चतुर्वेदी भारतीय आध्यात्मिक विषयों से जुड़ी एक फिल्म परियोजना पर काम कर रहे थे।
यहीं से अनुप्रिया की फिल्म निर्माण में सक्रिय भागीदारी शुरू हुई।
एक इंटरव्यू में अनुप्रिया ने बताया था कि उन्होंने पहले कभी फिल्म प्रोड्यूसर बनने की योजना नहीं बनाई थी। एक समय वह किताब या कॉमिक बुक के जरिए कहानी कहने के बारे में सोच रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां उन्हें सिनेमा की दुनिया में ले आईं।
20 साल की उम्र में आया फिल्म बनाने का विचार
अनुप्रिया नागर के मुताबिक, जब वह लगभग 20 वर्ष की थीं, तब कहानी कहने के लिए अलग-अलग माध्यमों पर विचार कर रही थीं।
उनके सामने किताब और कॉमिक जैसे विकल्प थे, लेकिन भारत आने और फिल्ममेकिंग से जुड़े लोगों से मिलने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि सिनेमा एक शक्तिशाली माध्यम हो सकता है।
यहीं से वह एक ऐसे प्रोजेक्ट से जुड़ीं, जिसने आगे चलकर हनुमान अंश का रूप लिया।
कलाकारों के बीच पली-बढ़ीं अनुप्रिया
अनुप्रिया का बचपन कला-केंद्रित वातावरण में बीता है। उनका परिवार कला संग्रह से जुड़ा रहा है, जिसके कारण उन्हें बचपन से ही भारतीय कला और कलाकारों के काम को करीब से देखने का अवसर मिला।
भारतीय आधुनिक कला के कई बड़े नामों के कार्यों और कला संस्कृति से परिचित माहौल ने उनकी रचनात्मक सोच को प्रभावित किया।
उनके अनुसार, इसी माहौल ने उन्हें कहानियों को अलग नजरिए से देखने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने की प्रेरणा दी।
क्या है हनुमान अंश की कहानी?
हनुमान अंश एक डिवोशनल और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से जुड़ी फिल्म है। फिल्म भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से प्रेरित विषय को सिनेमाई रूप में प्रस्तुत करती है।
फिल्म की कहानी और प्रस्तुति ने धीरे-धीरे दर्शकों का ध्यान खींचा। शुरुआत में सीमित स्तर पर चर्चा में रहने के बाद फिल्म के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच बातचीत बढ़ती गई।
हनुमान अंश कब रिलीज हुई?
रिपोर्ट्स के अनुसार, हनुमान अंश 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। शुरुआती दिनों में फिल्म का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा रहा।
हालांकि, बाद के हफ्तों में फिल्म को दर्शकों से बेहतर प्रतिक्रिया मिलने लगी और इसकी कमाई में तेजी देखी गई। फिल्म की चर्चा बढ़ने के साथ इसके कलाकारों और मेकर्स को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी।
फिल्म के बजट और बॉक्स ऑफिस आंकड़ों को लेकर अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अलग-अलग दावे किए गए हैं। इसलिए आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध होने पर ही अंतिम बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड को निश्चित रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए।
हनुमान अंश की स्टार कास्ट
फिल्म ‘हनुमान अंश’ में कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं।
फिल्म से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल हैं:
- शोभिनव सत्या
- चंदन आनंद
- पूर्णिमा तिवारी
फिल्म का लेखन, निर्देशन और निर्माण डॉ. विशाल चतुर्वेदी से जुड़ा बताया गया है।
कम उम्र में प्रोड्यूसर बनने की कहानी क्यों है खास?
अनुप्रिया नागर की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने पारंपरिक फिल्ममेकिंग करियर की योजना के साथ शुरुआत नहीं की थी।
वह इकोनॉमिक्स की पढ़ाई कर रही थीं, कला जगत में करियर बनाने की तैयारी कर रही थीं और उनकी दिलचस्पी रिसर्च व स्टोरीटेलिंग में थी। लेकिन एक रिसर्च, भारत वापसी और फिल्ममेकर से हुई मुलाकात ने उनके करियर की दिशा बदल दी।
21 वर्ष की उम्र में फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ना युवा क्रिएटिव प्रोफेशनल्स के लिए भी एक दिलचस्प उदाहरण है कि कभी-कभी करियर का सबसे बड़ा अवसर पहले से बनाई गई योजना से बिल्कुल अलग दिशा में मिल सकता है।
हनुमान अंश और अनुप्रिया नागर को लेकर क्यों बढ़ रही है चर्चा?
‘हनुमान अंश’ की चर्चा के पीछे केवल फिल्म का विषय ही नहीं, बल्कि इसके निर्माण से जुड़ी कहानी भी एक बड़ी वजह है।
एक युवा प्रोड्यूसर, कला जगत से जुड़ी पृष्ठभूमि, विदेश में पढ़ाई, Steve Jobs से जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों पर रिसर्च और फिर भारतीय आध्यात्मिक विषय पर फिल्म निर्माण—ये सभी पहलू अनुप्रिया नागर की यात्रा को दिलचस्प बनाते हैं।
अब देखना होगा कि ‘हनुमान अंश’ के बाद अनुप्रिया नागर भविष्य में किन नए फिल्म प्रोजेक्ट्स पर काम करती हैं और भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान कैसे बनाती हैं।
निष्कर्ष
हनुमान अंश प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर की कहानी पारंपरिक फिल्मी सफर से अलग है। इकोनॉमिक्स की पढ़ाई से लेकर कला जगत में करियर बनाने की तैयारी और फिर फिल्म प्रोडक्शन तक पहुंचने का उनका सफर कई अप्रत्याशित घटनाओं से भरा रहा।
स्टीव जॉब्स से जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों पर रिसर्च ने उनकी सोच को प्रभावित किया और भारत लौटने के बाद फिल्ममेकिंग की दुनिया से जुड़ने का अवसर मिला। आज ‘हनुमान अंश’ की सफलता के साथ अनुप्रिया नागर का नाम भी चर्चा में है और वह युवा फिल्म निर्माताओं की नई पीढ़ी में एक दिलचस्प नाम बनकर उभरी हैं।





